सीमित आर्थिक संसाधन और ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े विद्यार्थियों के लिए शासन की योजनाएं शिक्षा की राह आसान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
ऐसी ही सफलता की प्रेरक कहानी बिरसा विकासखंड के ग्राम गोवारी निवासी खिलेश्वर मेरावी की है, जिन्होंने शासकीय योजनाओं का लाभ लेकर अपनी शिक्षा पूरी की और अब माध्यमिक शिक्षक से सहायक प्राध्यापक गणित बनने की उपलब्धि हासिल की है।खिलेश्वर मेरावी बताते हैं कि उनकी प्रारंभिक शिक्षा शासकीय प्राथमिक शाला गोवारी से शुरू हुई। इसके बाद उन्होंने हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी की पढ़ाई के लिए उत्कृष्ट विद्यालय बिरसा में प्रवेश लिया।
परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वे प्रतिदिन गांव से बिरसा आना-जाना कर अपनी पढ़ाई जारी रख सकें। उनके पिता किसान हैं और माता गृहिणी हैं। ऐसे में शासन द्वारा उपलब्ध कराई गई छात्रावास सुविधा उनके लिए शिक्षा जारी रखने का महत्वपूर्ण सहारा बनी।खिलेश्वर बताते हैं कि छात्रावास में रहकर उन्होंने हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी की पढ़ाई पूरी की।
छात्रावास में रहने की सुविधा मिलने से उन्हें आवागमन की परेशानी से मुक्ति मिली और वे अपना पूरा ध्यान पढ़ाई पर केंद्रित कर सके। वे कहते हैं कि शासन-प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई गई यह सुविधा उनके शैक्षणिक जीवन में बेहद उपयोगी साबित हुई।
छात्रवृत्ति और आवास सहायता से उच्च शिक्षा का रास्ता हुआ आसान
हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी के बाद खिलेश्वर ने उच्च शिक्षा के लिए शासकीय जटाशंकर त्रिवेदी स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बालाघाट में प्रवेश लिया। यहां उन्होंने स्नातक एवं स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की। इस दौरान शासन की छात्रवृत्ति एवं आवास सहायता योजना ने उनकी पढ़ाई को आर्थिक संबल दिया।खिलेश्वर बताते हैं कि उच्च शिक्षा के दौरान मिली छात्रवृत्ति और आवास सहायता के कारण उन्हें अपनी पढ़ाई के खर्च को लेकर परेशान नहीं होना पड़ा।
इन योजनाओं ने उन्हें अपनी पढ़ाई निरंतर जारी रखने और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने का अवसर दिया। आज उनकी मेहनत और शासन की योजनाओं से मिली सहायता का परिणाम सामने है। माध्यमिक शिक्षक के रूप में सेवाएं दे रहे खिलेश्वर मेरावी का चयन सहायक प्राध्यापक गणित के पद के लिए हुआ है।
एक ग्रामीण एवं आदिवासी अंचल से निकलकर उच्च शिक्षा और फिर सहायक प्राध्यापक के पद तक पहुंचने का उनका सफर क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का उदाहरण है।
विद्यार्थियों से बोले—योजनाओं का लाभ लेकर अपने सपनों को दें उड़ान
खिलेश्वर मेरावी शासन की योजनाओं के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहते हैं कि ये योजनाएं केवल उनके लिए ही नहीं, बल्कि उनके साथ पढ़ने वाले अनेक विद्यार्थियों के लिए भी बेहद उपयोगी साबित हुई हैं। वे विद्यार्थियों से अपील करते हुए कहते हैं, “शासन-प्रशासन की ओर से विद्यार्थियों के लिए जितनी भी योजनाएं संचालित की जा रही हैं, उनका लाभ उठाइए। अच्छी तरह पढ़ाई कीजिए, मेहनत और तैयारी में कोई कमी मत रखिए।
परिस्थितियां चाहे जैसी हों, लक्ष्य निर्धारित करके आगे बढ़ेंगे तो सफलता जरूर मिलेगी।”खिलेश्वर की कहानी यह बताती है कि सुविधाओं का सही उपयोग, मेहनत और दृढ़ संकल्प मिलकर शिक्षा के माध्यम से जीवन की दिशा बदल सकते हैं। शासन की छात्रावास, छात्रवृत्ति और आवास सहायता जैसी योजनाएं दूरस्थ आदिवासी अंचलों के विद्यार्थियों को आगे बढ़ने का अवसर दे रही हैं और ऐसे विद्यार्थियों के सपनों को नई उड़ान मिल रही है।


