जिम्मेदारियां चाहे परिवार की हों या व्यवसाय की, यदि मेहनत और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का संकल्प हो तो परिस्थितियां भी रास्ता बनाने लगती हैं। नरसिंहपुर जिले के चांवरपाठा क्षेत्र की श्रीमती भगवती कुशवाहा की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। परिवार और खेती की जिम्मेदारियां संभालते हुए उन्होंने अपने पारंपरिक कृषि अनुभव को व्यवसाय का रूप देने का निर्णय लिया और प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना का लाभ लेकर ट्रेक्टर चलित मिनी राइस मिल की स्थापना की। आज उनकी यह पहल न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी उपलब्ध करा रही है।
पारंपरिक खेती से उद्यम की ओर बढ़ाया कदम
नरसिंहपुर निवासी श्रीमती भगवती कुशवाहा ने कक्षा 8 तक शिक्षा प्राप्त की है। परिवार में पारंपरिक रूप से खेती का काम होता रहा है। खेती-किसानी से जुड़े रहने के दौरान उन्होंने महसूस किया कि केवल कच्चे कृषि उत्पाद के रूप में धान बेचने की बजाय यदि उसका प्रसंस्करण कर चावल के रूप में बाजार तक पहुंचाया जाए, तो उत्पाद का बेहतर मूल्य प्राप्त किया जा सकता है। इसी सोच ने उन्हें एक नए उद्यम की शुरुआत करने के लिए प्रेरित किया।
शुरुआत में व्यवसाय और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं था। धान की सही कीमत न मिलना और सीमित संसाधन भी चुनौती थी। लेकिन श्रीमती भगवती ने इन चुनौतियों को अवसर में बदलने का निर्णय लिया।
पीएम एफएमई योजना बनी कारोबार के विस्तार की मजबूत आधारशिला
श्रीमती भगवती कुशवाहा ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना से जुड़कर चावल प्रसंस्करण इकाई स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ाया। उनकी परियोजना के लिए 28.80 लाख रुपये की राशि स्वीकृत हुई, जिसमें 17.28 लाख रुपये की ऋण राशि शामिल है। केनरा बैंक गाडरवारा शाखा के माध्यम से उन्हें वित्तीय सहयोग प्राप्त हुआ। योजना से मिले सहयोग ने उनके सपने को वास्तविकता में बदलने का आधार प्रदान किया और उन्होंने ट्रेक्टर चलित मिनी राइस मिल स्थापित की।
अब खेत से सीधे चावल प्रसंस्करण तक का सफर
मिनी राइस मिल शुरू होने के बाद श्रीमती भगवती की गतिविधियां केवल अपने खेत तक सीमित नहीं रहीं। वे आसपास के गांवों में जाकर किसानों से धान प्राप्त कर उसे चावल में प्रसंस्कृत करने का कार्य भी कर रही हैं। इस पहल से किसानों को अपने धान के प्रसंस्करण के लिए स्थानीय स्तर पर सुविधा मिल रही है। इससे समय और परिवहन संबंधी कठिनाइयों को कम करने में भी मदद मिलती है। श्रीमती भगवती का प्रयास है कि किसानों को उनके उत्पाद का बेहतर मूल्य मिले और स्थानीय स्तर पर ही कृषि उपज के मूल्य संवर्धन की प्रक्रिया को बढ़ावा मिले।
उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता में हुआ सुधार
उक्त योजना का लाभ लेने के बाद शुरू हुई मिनी राइस मिल से उनकी उत्पादन क्षमता में वृद्धि हुई है। पहले जहां पारंपरिक तरीके से कृषि कार्य और उपज के विक्रय तक ही गतिविधियां सीमित थीं, वहीं अब धान का प्रसंस्करण कर चावल तैयार किया जा रहा है। चावल की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इससे उत्पाद को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की संभावनाएं बढ़ी हैं।
आय में वृद्धि के साथ मिला रोजगार का अवसर
व्यवसाय शुरू होने के बाद श्रीमती भगवती की आय के स्रोत में विस्तार हुआ है। उनके अनुसार पहले परिवार की आय मुख्य रूप से खेती पर निर्भर थी, लेकिन अब राइस मिल से भी आय प्राप्त हो रही है। इस उद्यम से 4 व्यक्तियों को रोजगार भी मिला है। इस तरह एक छोटे खाद्य प्रसंस्करण उद्यम ने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन में भी योगदान दिया है।
श्रीमती भगवती अब अपने उद्यम को और आगे बढ़ाने की योजना बना रही हैं। भविष्य में राइस मिल के आधुनिकीकरण, उत्पादन क्षमता में विस्तार और नई तकनीक के उपयोग की दिशा में कार्य करने की योजना है। उनका प्रयास है कि स्थानीय किसानों से अधिक मात्रा में धान लेकर उसका प्रसंस्करण किया जाए और तैयार चावल को बेहतर बाजार उपलब्ध कराया जाए।
श्रीमती भगवती कुशवाहा इस सफलता के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को धन्यवाद देती हैं।




