भारत की सांस्कृतिक परंपरा में भगवान श्रीराम के जीवन-चरित्र और उनके आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाने की सुदीर्घ एवं समृद्ध परंपरा रही है। श्रीराम के जीवन के विविध प्रसंगों यथा जन्म, बाल लीलाओं, वनगमन, सीता हरण, हनुमान भक्ति, लंका विजय और अयोध्या वापसी को अभिनय, संवाद, संगीत, गायन एवं आकर्षक वेशभूषा के माध्यम से मंच पर जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जाता रहा है। लोकजीवन में विकसित इस अनूठी नाट्य परंपरा को ‘श्रीरामलीला’ के नाम से जाना जाता है। मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला सुप्रतिष्ठित ‘अंतर्राष्ट्रीय श्रीरामलीला उत्सव’ 13 से 19 अक्टूबर, 2026 तक राघव प्रयाग घाट, चित्रकूट में भी किया जा रहा है।
चित्रकूट में सात दिनों में जीवंत होंगे श्रीरामकथा के विविध प्रसंग
जैसा कि विदित है कि श्रीराम ने अपने वन गमन के दौरान का अधिकांश समय चित्रकूट में व्यतीत किया और उनसे संबंधित अनेक पवित्र स्थल यहां हैं। 13 से 19 अक्टूबर, 2026 तक राघव प्रयाग घाट, चित्रकूट में ‘अंतर्राष्ट्रीय श्रीरामलीला उत्सव’ का आयोजन किया जा रहा है। विशाला सांस्कृतिक एवं लोकहित समिति, उज्जैन के कलाकार छह दिनों तक श्रीरामकथा के विविध प्रसंगों की प्रस्तुति यहां देंगे। 13 अक्टूबर को उत्सव शुभारंभ श्रीराम जन्म एवं बाल लीला प्रसंग से होगा। इसमें श्रीराम जन्म, विश्वामित्र का आगमन, ताड़का वध और अहल्या उद्धार जैसे प्रसंग प्रस्तुत किए जाएंगे। 14 अक्टूबर को पूर्वरंग में विभूति श्रीनिवास राजू चण्डू यक्षगान बुंधम, आंध्रप्रदेश द्वारा यक्षगान शैली में महर्षि विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा, सीता स्वयंवर, श्रीराम वनवास एवं श्रीराम-रावण युद्ध की प्रस्तुति होगी। इसके बाद मुख्य लीला में सीता स्वयंवर से जुड़े प्रसंगों के साथ मिथिला नगरी का भव्य डिजिटल स्वरूप, शिव धनुष, सीता स्वयंवर एवं चारों भ्राताओं का विवाह प्रसंग दर्शाया जाएगा। 15 अक्टूबर को पूर्वरंग में श्रीरामलीला दल, थाईलैंड द्वारा प्रस्तुति दी जाएगी। इसके बाद मुख्य लीला में वनगमन एवं वन-जीवन से जुड़े प्रसंगों में कैकेयी के वरदान, राम, सीता, लक्ष्मण का वनगमन, केवट प्रसंग, भरत मिलाप और खर-दूषण वध को प्रस्तुत किया जाएगा। 16 अक्टूबर को पूर्वरंग में चण्डूला कृष्णैया बुंदम, तेलंगाना द्वारा चण्डू भागवतम में सीताहरण, श्रीराम सुग्रीव मिलन, सुग्रीव-हनुमान संवाद, लंका दहन के प्रसंग प्रस्तुत किए जाएंगे। इसके बाद सीता हरण एवं श्रीराम की खोज के प्रसंग मंचित होंगे, जिसमें मारीच का छल, सीता हरण, जटायु युद्ध, श्रीराम का विलाप, श्रीराम-हनुमान मिलाप, श्रीराम-सुग्रीव मित्रता के प्रसंग होंगे। 17 अक्टूबर को हनुमान के लंका प्रवेश से जुड़े प्रसंगों में बाली वध, सुग्रीव राज्याभिषेक, हनुमानजी की शक्ति स्मरण, लंका में प्रवेश, माता सीता-हनुमान संवाद और लंका दहन को प्रस्तुत किया जाएगा। 18 अक्टूबर को रामसेतु निर्माण, समुद्र संवाद, रामसेतु निर्माण, विभीषण शरणागति, कुंभकर्ण वध और लक्ष्मण मूर्छा जैसे प्रसंगों का मंचन होगा। श्रीरामलीला उत्सव के समापन अवसर पर 19 अक्टूबर को पद्मश्री गेनादी पेचनीकोव स्मृति दिशा रामलीला, मास्को, रूस के कलाकारों द्वारा सीता स्वंयवर, श्रीराम का अयोध्या में स्वागत, सीता हरण, लंका में सीता, श्रीराम-रावण युद्ध की प्रस्तुति होगी। इसके बाद समापन रावण वध एवं श्रीराम राज्याभिषेक के साथ किया जाएगा। इसमें श्रीराम-रावण युद्ध, रावण वध, विभीषण का राज्याभिषेक, श्रीराम राज्याभिषेक और श्रीरामराज्य के प्रसंग प्रमुख रहेंगे।


