दसवाँ दाँत जंगल की सभा का है, बोर्ड के 364 नहीं। जगह: पर्यावरण परिसर, भोपाल। नाम: लेसर नोन स्पीशीज, चौथी राष्ट्रीय संगोष्ठी। आयोजक: सोसाइटी ऑफ नेचर हीलर्स (एसएनएचसी)। अवधि: तीन दिन।

उद्घाटन पैनल: श्री वी.एन. अम्बाड़े; श्री शुभरंजन सेन; श्री अजय यादव; डॉ. के. रविचंद्रन। चंबल की पंक्ति श्री ऋषिकेश शर्मा की: 2462 घड़ियाल; दुर्लभ कछुए भी। मुंहज़ोर 2463वाँ नहीं जोड़ती। यह निगरानी का आँकड़ा है, उस दिन की नई गणना नहीं।

जो जल्द है, जो घोंसला नहीं

श्री सेन: गांधी सागर में स्याहगोश (कैरेकल) विशेष प्रोजेक्ट—जल्द। मुंहज़ोर उसे शुरू नहीं लिखती। लेसर फ्लोरिकन मानसून सर्वे—उत्साहवर्धक नहीं, उन्हीं का वाक्य। क्रोकोडाइल प्रोजेक्ट: 1 जुलाई 1975; पैनल में 50 वर्ष। श्री बी.सी. चौधरी: राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य को मॉडल कहा। लोकार्पण: श्री आर. श्रीनिवास मूर्ति की पहली सिटीजन साइंस रिपोर्ट। चित्र टेंट के नीचे संगोष्ठी ग्रुप का है। चंबल का घोंसला इस काट में नहीं।

मुख्य बातें

  • 2462 चंबल के घड़ियाल की पंक्ति है; उस दिन की नई गिनती नहीं।
  • गांधी सागर स्याहगोश “जल्द” है; खुला प्रोजेक्ट उस दिन नहीं।
  • चित्र संगोष्ठी सभा का फ्रेम है; चंबल का घोंसला नहीं।

स्रोत और संदर्भ

  1. मध्य प्रदेश जनसंपर्क · लेसर नोन स्पीशीज पर चौथे राष्ट्रीय सम्मेलन में वन्यजीव संरक्षण के नए उपायों पर हुई चर्चा ↗17 जनवरी 2026

सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 18 सितंबर 2026।

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